कोटा में 7 दिन में 60 से ज़्यादा बकरियों की मौत: बीमारी या ज़हर?
घटना का स्थान:
राजस्थान के कोटा जिले में कैथून थाना क्षेत्र के चरण चौकी इलाके में एक गंभीर पशु स्वास्थ्य संकट सामने आया है। बीते एक सप्ताह में 60 से अधिक बकरियों की रहस्यमय तरीके से मौत हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
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हर दिन बकरियों की हो रही मौत:
स्थानीय निवासियों ने बताया कि गांव में हर दिन 5 से 10 बकरियां अचानक गिरकर मर रही हैं। गांव वालों ने सबसे पहले इसे सामान्य बीमारी समझा, लेकिन जब मरने वालों की संख्या बढ़ती गई, तो पशुपालन विभाग को सूचना दी गई।
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डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुँची:
जानकारी मिलते ही पशु चिकित्सालय की टीम डॉक्टरों के साथ मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में पाया गया कि मृत बकरियों के लीवर और लंग्स (फेफड़े) में खराबी के लक्षण मिले हैं।
क्या यह बीमारी है?
डॉक्टर सुभाष भटनागर ने बताया- शुरुवाती बारिश के बाद धोकड़े (जंगल में उगने वाले पेड़) मे साइनाइड आता है। जानवर उनकी टहनियां पत्तियाँ खा लेती है तो उनके लीवर सेल डेड होने लगती हैं। लंग्स पर भी असर देखने को मिलता हे। इसका असर 20 दिन बाद दिखाई देने लगता है।
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ग्रामीणों की चिंता और मांग:
गांव के निवासी जितेंद्र मीणा ने बताया कि,
> “हर दिन कोई न कोई बकरी मर रही है। यह अब सामान्य घटना नहीं रही। प्रशासन को जल्द सख्त कदम उठाने चाहिए।”
ग्रामीणों ने पशु चिकित्सा विभाग से मांग की है कि:
पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया जाए
बीमार बकरियों का नि:शुल्क इलाज किया जाए
संभावित संक्रमण को फैलने से रोका जाए
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ज़रूरी एहतियातें:
डॉक्टरों ने बकरी पालकों को कुछ सुझाव दिए हैं:
1. बकरियों को साफ और ताज़ा पानी पिलाएं
2. दूषित या गीली घास से परहेज़ करें
3. बीमार जानवरों को अलग रखें
4. समय पर टीकाकरण करवाएं
5. किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें
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प्रशासन से अपेक्षा:
स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि:
इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करें
यदि किसी तरह का ज़हर या वायरस कारण है, तो पूरे क्षेत्र में स्प्रे या वैक्सीनेशन की व्यवस्था करें
पशुपालकों को आर्थिक सहायता दी जाए जिनकी बकरियां मरी हैं
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निष्कर्ष:
कोटा के चरण चौकी क्षेत्र में बकरियों की मौत एक गंभीर पशु-स्वास्थ्य संकट है। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में लीवर और लंग्स में खराबी की बात सामने आई है, लेकिन वास्तविक कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। इस बीच, पशुपालकों और ग्रामीणों को सतर्क रहना होगा और प्रशासन से शीघ्र राहत की उम्मीद करनी चाहिए।
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