जयपुर: भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच का देशभर में विरोध हो रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह मैच कराए जाने के फैसले का कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन कड़ा विरोध कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि एक तरफ हमारे जवान शहीद हो रहे हैं, और दूसरी तरफ हम उनके हत्यारों के साथ क्रिकेट मैच खेल रहे हैं। इससे देश के शहीदों का अपमान होता है।
कांग्रेस और शिवसेना का विरोध
राजस्थान में कांग्रेस के खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमीन पठान ने जयपुर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान का मैच किसी सिनेमा हॉल या रेस्तरां में दिखाया गया, तो वे वहां टीवी तोड़ देंगे और मैच नहीं होने देंगे। पठान ने कहा कि पुलवामा जैसे हमलों के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से व्यापार बंद कर दिया था और वीजा तक देना बंद कर दिया था, लेकिन जय शाह के दबाव में पाकिस्तान के साथ मैच खेलने का फैसला किया गया है, जो कि देश की भावनाओं के खिलाफ है।
इसी तरह, जालोर में शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने भी मैच का विरोध किया। शिवसेना जिला प्रमुख रूपराज पुरोहित के नेतृत्व में महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिंदूर भेजकर मैच रद्द करने की मांग कर रही हैं। वे कह रही हैं कि जिन लोगों ने हमारी बहनों का सिंदूर मिटाया है, उनके साथ मैच नहीं खेला जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर
भारत-पाकिस्तान मैच रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम
कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि मौजूदा हालात में यह मैच देशहित के खिलाफ है और इससे शहीदों का अपमान होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, “इतनी जल्दी क्या है… एक मैच है, हो जाने दीजिए।”
शहीदों के अपमान का मुद्दा
विरोध करने वालों का कहना है कि सरकार और बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को शहीदों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका तर्क है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से चलने वाले आतंकवाद को खत्म नहीं करता, तब तक उसके साथ किसी भी तरह के संबंध नहीं होने चाहिए।भारत-पाकिस्तान मैच: शहीदों का अपमान? देश में बढ़ा विरोध
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