पाली, सोमेसर रेलवे स्टेशन पर शनिवार को 31 साल बाद एक ऐतिहासिक पल आया, जब पुणे से जोधपुर जाने वाली ट्रेन यहां दो मिनट के लिए रुकी। इस ठहराव का श्रेय मारवाड़ युवा संघर्ष समिति के लंबे संघर्ष को जाता है। गांव वालों के लिए यह किसी त्योहार से कम नहीं था, और उन्होंने इस अवसर का जश्न पूरे उत्साह के साथ मनाया।
गांव वालों ने किया भव्य स्वागत
ट्रेन के आने की घोषणा होते ही बड़ी संख्या में लोग ढोल-थाली लेकर प्लेटफॉर्म नंबर एक की ओर बढ़ चले। लोगों ने ट्रेन के पायलट का माला पहनाकर स्वागत किया, और खुशी में नाचने लगे। यहां तक कि महिलाएं भी ढोल-थाली पर नाच रही थीं। ग्रामीणों की खुशी इतनी ज्यादा थी कि वे ट्रेन के इंजन पर चढ़ गए और भारत माता के जयकारे लगाए।
समिति के प्रयासों का परिणाम
मारवाड़ युवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष हुकम सिंह सेपटवास ने बताया कि 1992 में भी इस ट्रेन को रुकवाने के लिए अभियान चलाया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। 2021 में इस अभियान को फिर से शुरू किया गया। समिति ने घर-घर जाकर लोगों को जोड़ा, सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया और रेल मंत्रालय तक अपनी बात पहुंचाई। इस प्रयास का ही नतीजा है कि आज सोमेसर में यह ट्रेन रुकी है।
स्थानीय लोगों को राहत
ग्रामीणों के अनुसार, अब तक पुणे या मुंबई जाने के लिए उन्हें फालना, रानी या मारवाड़ जंक्शन जैसे स्टेशनों पर जाना पड़ता था, जिसमें करीब 1500 से 2000 रुपये का खर्च और 1.5 से 2 घंटे का अतिरिक्त समय लगता था।
सोमेसर में ट्रेन के रुकने से आसपास के 50 से 60 गांवों के लोगों को सीधा फायदा होगा और उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।
स्वास्थ्यकर्मी ने पूरी की प्रतिज्ञा
मुंबई में रहने वाले एक मेडिकल व्यवसायी रामसिंह भी इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने के लिए सोमेसर पहुंचे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें समिति के संघर्ष के बारे में पता चला तो उन्होंने तीन महीने पहले ही जूते-चप्पल न पहनने की प्रतिज्ञा ली थी। ट्रेन के रुकने के बाद उन्होंने 14 सितंबर को अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। 31 साल बाद हुआ सपना साकार: सोमेसर में ट्रेन के ठहराव से ग्रामीणों में खुशी की लहर
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