बारां/किशनगंज
रानीबड़ौद गांव निवासी महेंद्र सुमन ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए साइकिल से चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंग की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर गांव लौटकर एक अद्भुत उदाहरण पेश किया। उनके आगमन पर क्षेत्रवासियों ने फूल-मालाओं और जयकारों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया।
225 दिन की कठिन यात्रा
महेंद्र सुमन पुत्र धन्नालाल ने यह साइकिल यात्रा 23 जनवरी 2025 से शुरू की थी। करीब 225 दिनों तक लगातार सर्दी, गर्मी और बारिश का सामना करते हुए उन्होंने यह यात्रा पूरी की। यात्रा के दौरान उन्होंने चार धाम—बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम् के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों—सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वर (तमिलनाडु) और घुश्मेश्वर (महाराष्ट्र) के दर्शन किए।
विशेष आकर्षण
महेंद्र सुमन ने इस यात्रा में भारत ही नहीं बल्कि नेपाल जाकर प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में भी दर्शन किए। यात्रा पूरी कर वे साइकिल से ही गांव लौटे, जहां धर्मप्रेमियों और ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया।
स्वागत और सम्मान
महेंद्र सुमन के स्वागत में कस्बे के मुख्य मार्गों पर लोगों ने पुष्प वर्षा की। कस्बे में भाजपा नगर अध्यक्ष जयप्रकाश सुमन और स्थानीय गणमान्य लोगों ने उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद महेंद्र को मंगलेश्वर व्यायामशाला में ठहराया गया, जहां उनके लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई।
प्रेरणा का स्रोत
महेंद्र सुमन की इस अनोखी यात्रा ने युवाओं के सामने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। बिना किसी साधन और विलासिता के उन्होंने धार्मिक स्थलों की कठिन यात्रा पूरी कर यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और आस्था से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रद्धा, साहस और संकल्प का प्रेरणास्रोत बन गई है। महेंद्र सुमन ने पूरी की 225 दिन की साइकिल यात्रा, चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंग के किए दर्शन
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