झालावाड़, राजस्थान – राजस्थान के झालावाड़ जिले में किसानों का महाआंदोलन शुरू हो गया है। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में हजारों किसानों ने जिला मुख्यालय के मिनी सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला है। किसान अपनी 51 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह धरना जारी रहेगा। झालावाड़ में किसानों का धरना जारी, 9 जिलों से पहुंचे किसान, 16 जिलों से और आने की संभावना
क्यों हो रहा है यह आंदोलन?
किसान नेताओं का आरोप है कि सरकारें चुनावी वादे तो करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती हैं। हाल ही में हुई भारी बारिश और अतिवृष्टि के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक इसका सर्वे भी नहीं करवाया है। किसानों का गुस्सा इस बात पर भी है कि उन्हें उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य (MSP) नहीं मिल रहा है। वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
किसानों की प्रमुख मांगें:
किसानों की 51 मांगों में से कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी: किसान चाहते हैं कि उनकी सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने की कानूनी गारंटी दी जाए।
फसल खराबे का मुआवजा: अतिवृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसलों को हुए नुकसान का 100% मुआवजा दिया जाए।
बिजली का निजीकरण बंद हो: बिजली विभाग का निजीकरण न किया जाए और किसानों को मिल रही रियायतें जारी रखी जाएं। रबी सीजन में 12 घंटे दिन की बिजली मिले और पुरानी तारों को बदला जाए।
विधानसभा में विशेष सत्र: किसानों के मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा में एक विशेष सत्र बुलाया जाए।
कर्जमाफी और पेंशन: सभी किसानों और खेत मजदूरों का सरकारी व गैर-सरकारी कर्ज माफ किया जाए, और उन्हें पेंशन दी जाए।
मनरेगा में सुधार: मनरेगा को खेती से जोड़ा जाए और “मेरा खेत, मेरा काम” के रूप में पारदर्शिता से लागू किया जाए।
धरना स्थल पर किसानों का जीवन:
आंदोलन में शामिल किसान अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर आए हैं। वे धरना स्थल पर ही दाल-बाटी बनाकर भोजन तैयार कर रहे हैं। कई किसान खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं। इस प्रदर्शन में युवा किसानों के साथ-साथ बुजुर्ग किसान भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
यह आंदोलन झालावाड़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चित्तौड़ प्रांत के 16 जिलों से किसान संगठन के पदाधिकारी भी इसमें शामिल हो रहे हैं। यह किसानों की एकजुटता का प्रतीक बन गया है और उन्होंने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
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