सरकार का फटाफट कदम
1. बड़े पैमाने पर मरम्मत और पुनर्निर्माण
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 7500 सरकारी स्कूल भवन मरम्मत या ध्वस्त करने की घोषणा की। इनमें जिन भवनों को सुरक्षित नहीं माना गया, वहां कंटेनर क्लासरूम में पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी ।
इस कार्य के लिए आपदा राहत कोष से ₹150 करोड़ के प्रस्ताव की मंजूरी दी गई है ।
2. घटिया निर्माण पर पाबंधी
घटिया निर्माण पाए जाने पर ठेकेदारों और अभियंताओं से वसूली का भी आदेश जारी किया गया है ।
नए निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता मॉनिटरिंग हेतु PWD की लैब्स से टेस्ट कराने की व्यवस्था की जाएगी ।
3. सरकार ने जिलों को निर्देश दिए
सभी स्कूल भवनों का GIS‑आधारित सर्वे ऐप के माध्यम से रिकॉर्ड बनाए जाने का आदेश ।
पिंक टॉयलेट्स, अग्नि सुरक्षा और प्राथमिक उपचार ट्रेनिंग जैसी गुणवत्ता संबंधी समीक्षा को अत्यंत जरूरी बताया गया ।
निजी स्कूलों का भी सर्वे कराई जाएगी—विशेष रूप से वाहन फिटनेस, ड्राइवर मेडिकल चेक, आदि सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए ।
शिक्षा मंत्री: राजस्थान के 7500 जर्ज़र सरकारी स्कूल तोड़े जाएंगे, कंटेनर मे पढ़ेंगे बच्चे
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विपक्ष और समाज की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस घटना को “हत्या” कहा और शिक्षा मंत्री दिलावर से त्यागपत्र की मांग की है ।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने व्यापक सुरक्षा ऑडिट की मांग की है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों ।
सोशल मीडिया पर छात्राओं, नरम चित्त, दरारें, और पानी भरे कक्षाओं की तस्वीरें वायरल हो गई, जिससे आम जनता में भारी रोष है ।
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मुख्य बिंदु विवरण
राष्ट্রীय स्तर की चेतावनी केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों से स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट करवाने को कहा है ।
स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी भवनों का तत्काल निरीक्षण कराया; पांच दिन में रिपोर्ट माँगी है ।
शिक्षा विभाग की जवाबदेही मरम्मत निधियों की गतिरोध, शिक्षकों की सजा, और कमजोर स्कूलों की पहचान प्राथमिकता बननी चाहिए। विभाजन खोशिये पर—आवश्यक भर्ती और कार्य-निदान प्रस्तावों की समीक्षा अभी शेष है ।
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