जयपुर, राजस्थान – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ (आयात शुल्क) ने राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। जयपुर के पास बगरू जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा है, जहां कभी मजदूरों की आवाजाही और मशीनों का शोर हुआ करता था। इस संकट ने न केवल बड़े निर्यातकों को, बल्कि हजारों छोटे कारीगरों और मजदूरों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।
ट्रंप टैरिफ का सीधा असर
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय हैंडीक्राफ्ट्स पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इससे अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय सामान बहुत महंगा हो गया है। परिणामस्वरूप, बड़े-बड़े ऑर्डर या तो रद्द कर दिए गए हैं या उन्हें रोक दिया गया है।
उत्पादन में भारी गिरावट: बगरू के एक फर्नीचर फैक्ट्री मालिक अशोक मारू बताते हैं कि उनकी फैक्ट्री में जहां पहले 25-30 लोग काम करते थे, अब सिर्फ 4-5 लोग ही बचे हैं। उन्होंने बताया कि टैरिफ के बाद खरीदार 50% (25% + 25%) महंगी कीमत पर माल खरीदने को तैयार नहीं हैं।
ड्राइवरों की सैलरी मुश्किल: एक ट्रांसपोर्टर हितेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने चार ट्रक बैंक से लोन लेकर खरीदे थे। वे इन ट्रकों से एक्सपोर्टर्स का माल जयपुर से मुद्रा पोर्ट तक पहुंचाते थे। अब उनका काम बंद हो गया है, जिससे ड्राइवरों की सैलरी देना भारी पड़ रहा है और बैंक की किस्तें भी नहीं चुका पा रहे हैं।
कंटेनरों की संख्या में कमी: ‘कॉन-कोर’ से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, पहले हर हफ्ते जयपुर से अमेरिका के लिए 378 कंटेनर जाते थे। 26 से 31 अगस्त के बीच यह संख्या घटकर 218 हो गई और 1 सितंबर के बाद से यह लगभग आधी हो गई है।
कारीगरों की पीड़ा
इस संकट की सबसे बड़ी मार उन कारीगरों पर पड़ी है, जो अपनी कला पर ही निर्भर हैं। मालू की फैक्ट्री में काम करने वाले देवा ने बताया कि उनके कई साथियों की नौकरी जा चुकी है और उनके परिवार के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई है। वे कहते हैं, “हम कारीगर हैं, हमें सिर्फ यही काम आता है। अब हम में से कई दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए भी तैयार हैं, पर कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है।”
नए कारोबारियों के लिए ज्यादा मुश्किल
यह संकट उन नए उद्यमियों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण है, जिन्होंने हाल ही में इस क्षेत्र में कदम रखा है। हर्ष सिंधी, जिन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया था, बताते हैं कि उन्हें एक बड़ा ऑर्डर मिला था, जिसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लेकर काम पूरा किया। लेकिन टैरिफ लगने के बाद वह ऑर्डर रद्द हो गया। वे कहते हैं, “खरीददार भारी डिस्काउंट मांग रहे हैं, जिससे हमारा मुनाफा इतना नहीं है कि हम 50% डिस्काउंट दे सकें।”
आगे की राह मुश्किल
राजस्थान हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम के को-ऑर्डिनेटर नवनीत झालानी का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि 26,000 करोड़ रुपये की राहत की खबरों का खंडन हुआ है, जिससे उनकी मुश्किलें और
बढ़ रही हैं।
जानकार बताते हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं और हैंडीक्राफ्ट उद्योग का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। यह एक ऐसा समय है जब सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और इस महत्वपूर्ण उद्योग को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। भारत-अमेरिका ट्रेड वॉर: राजस्थान के हस्तशिल्प और कारीगरों पर गहराता संकट
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