बारां जिले के सोरसन क्षेत्र में दुर्लभ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (खरमोर) पक्षी का ब्रीडिंग सेंटर 2026 से शुरू होगा। वन विभाग ने इस केंद्र के लिए 676 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई है। इस परियोजना का प्रथम चरण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण का कार्य तेजी से चल रहा है।
साल 2018 में एमओयू होने के बाद लंबे समय तक यह योजना अटकी रही थी, लेकिन वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने 2022 में निर्माण कार्य शुरू किया। अब तक फेंसिंग और कुछ इमारतों का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि, पहले चरण का काम निर्धारित समय 2024 के बजाय 2025 में पूरा हुआ।
यह प्रोजेक्ट पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से चल रहा है। इसका उद्देश्य खरमोर और गोडावन जैसे दुर्लभ पक्षियों का संरक्षण करना है। यहां कृत्रिम तरीके से खरमोर के अंडों का प्रजनन भी कराया जाएगा।
खरमोर पक्षी की खासियत
खरमोर एक शर्मीला और एकाकी पक्षी है। मादा की ऊंचाई नर से अधिक होती है। नर की लंबाई लगभग 45 सेमी और मादा की 52 सेमी होती है। यह घास के मैदानों में छिपा रहता है और 6 से 8 फीट तक छलांग लगा सकता है। मादा सितंबर में अंडे देती है और इसकी आवाज मेढ़क जैसी होती है।
2026 से होगा संचालन
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि मोहिबुद्दीन ने बताया कि दूसरे चरण के पूरे होने के बाद 2026 से केंद्र का संचालन शुरू होगा। इसमें बिजली की व्यवस्था, नई इमारतें और आधुनिक मशीनों की स्थापना कर पक्षियों के प्रजनन को बढ़ावा दिया जाएगा। बारां के सोरसन में 2026 से शुरू होगा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (खरमोर) का ब्रीडिंग सेंटर
यह ब्रीडिंग सेंटर न केवल बारां जिले के लिए गौरव का विषय होगा, बल्कि देश में दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में भी अहम योगदान देगा।
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