बारां, राजस्थान – बारां जिले में इस साल की खरीफ सीजन में धान की खेती को लेकर किसानों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मानसून की अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त मात्रा में पानी जमा हो चुका है, जिससे धान की रोपाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
धान की खेती में बारां बना अग्रणी जिला:
बारां जिले की धान न केवल देशभर में लोकप्रिय है, बल्कि इसकी गुणवत्ता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में जिले में 40 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बुवाई का लक्ष्य तय किया है, जिसमें से अब तक 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी है।
किसानों में उत्साह, खेतों में रौनक:
मानसून की बारिश के बाद खेतों में पानी भर जाने से किसानों को सिंचाई की चिंता से राहत मिली है। इससे वे बिना रुकावट के रोपाई कर पा रहे हैं। खेतों में पुरुषों के साथ महिलाएं भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और पूरी लगन से धान की रोपाई कर रही हैं।
गांवों में चारों ओर हरियाली और मेहनत का समर्पण साफ नजर आता है।
कृषि विभाग की तैयारी और समर्थन:
कृषि विभाग ने किसानों को उचित बीज, उर्वरक और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि इसी तरह से अनुकूल मौसम बना रहा, तो बारां जिले में इस बार रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना है।
बारां की धान क्यों है खास?
जिले मे पूसा वन, पूसा 1121, पूसा 1718, पूसा 1509, सुगंधा और बासमती जैसी उन्नत किस्मो का उत्पादन होता हैं।
बारां जिले की मिट्टी और जलवायु धान की खेती के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है। यहां की धान की किस्में स्वादिष्ट, पोषणयुक्त और निर्यात योग्य मानी जाती हैं। यही कारण है कि यहां की धान गुजरात, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और दक्षिण भारत के साथ-साथ विदेशो में भेजी जाती है।
बारां की धान की देश-विदेश में बढ़ती मांग: 40 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य, अब तक 26 हजार हेक्टेयर में रोपाई पूरी
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निष्कर्ष:
धान की खेती ने बारां जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है और किसान अपनी मेहनत से इस क्षेत्र को राज्य के अग्रणी कृषि जिलों में शामिल कर रहे हैं। यदि बारिश इसी तरह होती रही और सरकारी सहयोग बना रहा, तो बारां की धान जल्द ही अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करेगी।
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