जयपुर। गुरुवार को जयपुर स्थित एमडी रोड पर पीलवा गार्डन में ‘कम्युनिटी ड्रीम्स’ NGO की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और भारतीय संस्कृति को लेकर अपने विचार साझा किए। फिल्मों में ठाकुरों की छवि पर उठे सवाल: डॉ. लक्ष्यराज सिंह बोले– “हमने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाया”
महिला शिक्षा की ऐतिहासिक पहल
डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की चर्चा आज हो रही है, लेकिन हमारे पूर्वज महाराणा शंभू सिंह ने 100 साल पहले ही इस दिशा में बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने उदयपुर में बालिकाओं की शिक्षा के लिए पहला विद्यालय शुरू कराया था। लक्ष्यराज ने कहा, “आज हम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करते हैं, जबकि हमारे पूर्वज पहले ही इस दिशा में कार्य कर चुके हैं। मेवाड़ बोलता नहीं है, करके दिखाता है।”
हिंदी भाषा की खूबसूरती पर जोर
लक्ष्यराज सिंह ने हिंदी भाषा की पैरवी करते हुए कहा कि लोगों को अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा सेवा से शुरू होकर शून्य पर खत्म हो जाती है, जबकि हिंदी अ से अनपढ़ और ज्ञ से ज्ञानी तक ले जाती है। यही हमारी भाषा की असली खूबसूरती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अन्य भाषाएँ सीखें, लेकिन अपनी भाषा और संस्कृति को हमेशा प्राथमिकता दें।
परिवार के सदस्य भी रहे मौजूद
इस मौके पर उनके साथ उनकी पत्नी निवृत्ति कुमारी और सास भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में कला और शिल्प से जुड़े प्रदर्शन भी आयोजित किए गए, जिनमें लक्ष्यराज सिंह ने गहरी रुचि दिखाई और कलाकारों की सराहना की।
फिल्मों में ठाकुरों की छवि पर सवाल
लक्ष्यराज सिंह ने फिल्मों में ठाकुर समाज की नकारात्मक छवि पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 1980-90 के दशक की फिल्मों में ठाकुरों को गाँव का सबसे बड़ा अपराधी बताया गया, जबकि वास्तविकता में हमारे जैसे परिवारों ने सदैव महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि समाज को गलत छवि से बाहर आना होगा और सच्चाई को पहचानना होगा।
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