नरेश मीणा को झालावाड़ में स्कूल हादसे के विरोध में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अब हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। झालावाड़ स्कूल हादसा: कौन हैं नरेश मीणा, जिन्हें हाई कोर्ट से मिली जमानत?
कौन हैं नरेश मीणा?
नरेश मीणा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।
वह राजस्थान यूनिवर्सिटी में महासचिव रह चुके हैं।
वे डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समर्थक भी रहे हैं।
छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने कई बार उग्र प्रदर्शन किए हैं।
नरेश मीणा, सचिन पायलट के प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस में शामिल हुए थे।
2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से टिकट मांगा था।
टिकट न मिलने पर उन्होंने बागी होकर छबड़ा (बारां) विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 44 हजार वोट हासिल कर कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया।
पूरा मामला क्या है?
25 जुलाई को झालावाड़ में पिपलोदी सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा SRG हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
पहले से चल रहा था धरना: नरेश के वकील फतेहराम मीणा और रजनीश गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि घटना वाले दिन (25 जुलाई) अस्पताल के बाहर पहले से धरना-प्रदर्शन चल रहे थे। नरेश दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे और धरने में शामिल हुए। पुलिस ने उसी दिन नरेश मीणा को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
अगले दिन झालावाड़ जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने मेडिकल फैसिलिटी में बाधा डालने, एंबुलेंस और आईसीयू स्टाफ को अस्पताल में जाने से रोकने का मामला दर्ज कराया। इस पर पुलिस ने 26 जुलाई को नरेश को थाने से ही गिरफ्तार कर लिया।
सरकार ने कहा- नरेश की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है
गुरुवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि नरेश की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। इसके जवाब में नरेश के वकील ने कहा कि उन्हें 12 मामलों में बरी किया जा चुका है। वहीं, जो मामले लंबित हैं, वे सभी राजनीतिक मुकदमे हैं।
इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि नरेश को समरवाता हिंसा में बेल शर्तों के साथ दी गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि
क्या धरना-प्रदर्शन करना अब अपराध हो गया है?
न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की अदालत ने नरेश को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
Discover more from HadotiNews24
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
